गोपाल अहिरवार

गोपाल अहिरवार

मैं गोपाल अहिरवार, भगत सिंह वार्ड सागर का निवासी हूं। मुझे अनाथ/बेघर बालक आवासीय छात्रावास, धर्मश्री, सागर में आकर एक नई दिशा मिली। मेरी आयु लगभग 6 वर्ष थी, तब मेरे माता पिता की मृत्यु हो गई थी। मुझे मेरे बड़े पिता जी (पिता के बडे भाई), श्री भगवानदास अहिरवार जी ने मुझे सहारा दिया, किन्तु कुछ गलत संगत के कारण उन्होंने मुझे संजीवनी बाल आश्रम रजाखेड़ी, सागर में भेज दिया। मैंने प्राथमिक शाला रजाखेड़ी से कक्षा 5 वीं तक अध्ययन किया इसी दौरान मैं बाल आश्रम से भाग गया और कटरा बाजार, सागर में एक चाय की दुकान पर काम करने लगा। कुछ समय बाद एक झगड़े के कारण मैं दिल्ली भाग गया। वहां जामिया नगर ओखला में एक स्वयंसेवी संस्था, डान वासको होम सेण्टर में 05 माह रहा। फिर बड़े पिता जी द्वारा लगातार की जा रही तलाश के कारण मुझे चाइल्डलाईन सागर भेजा गया। चाईल्ड लाइन सेंटर सागर द्वारा एवं बड़े पापा की पहल पर मुझे अनाथ/बेघर बालक आवासीय छात्रावास, धर्मश्री, सागर में दर्ज कराया गया। यहां का वातावरण, समस्त स्टाफ की कार्यशैली तथा अच्छी व्यवस्थाओं के कारण अब मुझे कहीं जाने की इच्छा नहीं होती। मुझे कुछ बनकर दिखाने की ललक पैदा हो गई। अब मुझे समीपस्थ माध्यमिक शाला में कक्षा 6 वीं में प्रवेश मिल गया है। मैं अच्छे मन से रोज पढ़ाई करता हूं और मुझे शाला परिवार के शिक्षक भी पसंद करते हैं। मैं भी सबको विश्वास दिलाता, कि बड़े होकर अपने विद्यालय और छात्रावास  नाम रोशन करूंगा। छात्रावास में, मैं घर जैसे वातावरण में रहता हूं, यहां खेल भी खिलाये जाते हैं। सभी लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं। सहायक वार्डन मैडम मुझे मां जैसा प्यार करतीं हैं। मेरे मां पिता नहीं हैं लेकिन मुझे छात्रावास परिवार ने कभी यह महसूस नहीं होने दिया। मै बहुत आभारी हूं, कि मुझे एक अच्छा और सफल इंसान बनाने में सब सहयोग कर रहें हैं।